The truth behind Ravana's 10 heads. (रावण के 10 सिर)

कहा जाता है कि रावण के 10 सिर थे हर सिर के अलग-अलग ​अ​र्थ थे। It's believed that all 10 heads of the Asur Ravana had different meanings.

दशानन का अर्थ है- जिसके 10 सिर हों। कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने वर्षों तक कठोर तप किया लेकिन भगवान शिव प्रसन्न नहीं हुए। 

It's said that, Ravana prayed for years still Lord Shiva was not happy to shower his blessings on him.

इसके बाद रावण ने भगवान शिव को अपना सिर अर्पित करने का निर्णय लिया।

Ravana decided to dedicate his head to Lord Shiva. 


भगवान शिव की भक्ति में लीन रावण ने अपना सिर काटकर भोलेनाथ को अर्पित कर दिया, लेकिन उसकी मृत्यु नहीं हुई। उसकी जगह दूसरा सिर आ गया। ऐसे एक-एक करके रावण ने अपने 9 सिर भगवान शिव को ​अर्पित कर दिए।

Ravana beheaded himself and respectfully devoted his head to Lord Shiva but did not die. Another head rose from his neck. Ravana dedicated his 9 heads one by one to Lord Shiva.

जब 10वीं बार उसने अपना सिर भगवान को अर्पित करना चाहता तभी भगवान शिव वहां प्रकट हो गए। वे रावण की भक्ति से काफी प्रसन्न हुए। इसलिए रावण को भगवान शिव का परम भक्त कहा जाता है।

10th time Lord Shiva himself appeared in front of Ravana and became happy by Ravana's dedication and devotion towards him. That is why Ravana is known as the Supreme Devotee of Lord Shiva.

रावण के 10 सिर हैं इन बुराइयों के प्रतीक (Ravana's 10 heads are indicators to following 10 symbols of Evil):

पहला काम (Lust), दूसरा क्रोध (Anger), तीसरा लोभ(Greed), चौथा मोह (Attraction), पांचवां मादा (गौरव) (Pride), छठां ईर्ष्या (Jealousy), सातवां मन (Heart), आठवां ज्ञान (Knowledge), नौवां चित्त (Mind) और दसवां अहंकार (Ego)

Post a Comment

0 Comments